स्रोतस के मूल सिद्धांतों का वर्णन

आयुर्वेद केवल रोगों का उपचार करने की पद्धति नहीं है, बल्कि यह शरीर, मन और आत्मा के संतुलन का विज्ञान है। आयुर्वेद में शरीर की संरचना और उसके कार्यों को समझाने के लिए कई महत्वपूर्ण सिद्धांत बताए गए हैं। इन्हीं में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्धांत है — स्रोतस । स्रोतस शब्द संस्कृत के “सृ” … Read more

दोष, धातु और मल ही शरीर का मूल है

आयुर्वेद के अनुसार स्वस्थ शरीर का आधार आयुर्वेद केवल एक चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने की प्राचीन भारतीय विज्ञान प्रणाली है। आयुर्वेद में मानव शरीर को समझाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण सिद्धांत बताए गए हैं। उन्हीं में से एक अत्यंत प्रसिद्ध सिद्धांत है — “दोष धातु मला मूलं हि शरीरम्”।इसका अर्थ है कि … Read more

अष्टांग हृदय का परिचय (B.A.M.S. प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए)

आयुर्वेद के प्रमुख ग्रंथों में अष्टांग हृदय का विशेष स्थान है। यह ग्रंथ विद्यार्थियों के लिए सरल, व्यवस्थित और अत्यंत उपयोगी माना जाता है। B.A.M.S. प्रथम वर्ष में अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों के लिए इसका मूलभूत ज्ञान आवश्यक है, क्योंकि यही आगे के विषयों की नींव तैयार करता है। अष्टांग हृदय क्या है? “अष्टांग हृदय” … Read more

शरीर दोष और मानस दोष का वर्णन

आयुर्वेद में “दोष” शब्द का अर्थ होता है—वह तत्व जो शरीर या मन के संतुलन को बिगाड़ सकता है। आयुर्वेद के अनुसार स्वस्थ जीवन के लिए शरीर (शरीर) और मन (मन) दोनों का संतुलित होना आवश्यक है। शरीर में होने वाले दोषों को शरीर दोष कहा जाता है और मन में उत्पन्न होने वाले दोषों … Read more

त्रिगुण, त्रिदोष और पंचमहाभूत का पारस्परिक संबंध

आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों में पंचमहाभूत, त्रिदोष और त्रिगुण का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। शरीर, मन और प्रकृति—इन तीनों की संरचना और कार्यप्रणाली को समझने के लिए इन तत्वों का अध्ययन आवश्यक है। प्राचीन ग्रंथों जैसे चरक संहिता और सुश्रुत संहिता में इन सिद्धांतों का विस्तृत वर्णन मिलता है, जो यह बताते हैं कि मानव … Read more

“क्रिया”, “शरीर” और “शारीर” शब्द की परिभाषा तथा पर्यायवाची

संस्कृत और आयुर्वेद में प्रयुक्त शब्दों का गहरा और विस्तृत अर्थ होता है। ये शब्द केवल सामान्य अर्थ तक सीमित नहीं रहते, बल्कि इनके पीछे एक गहरी वैचारिक और वैज्ञानिक पृष्ठभूमि भी होती है। ऐसे ही तीन महत्वपूर्ण शब्द हैं—क्रिया, शरीर और शारीर। इनका सही अर्थ समझना विशेष रूप से आयुर्वेद और संस्कृत के विद्यार्थियों … Read more

वात, पित्त और कफ के लक्षण: कैसे पहचानें अपनी दोष असंतुलन?

आयुर्वेद के अनुसार हमारा शरीर तीन मुख्य दोषों—वात, पित्त और कफ—से मिलकर बना है। ये दोष शरीर और मन के सभी कार्यों को नियंत्रित करते हैं। जब ये संतुलन में रहते हैं, तो हम स्वस्थ रहते हैं। लेकिन जैसे ही इनका संतुलन बिगड़ता है, शरीर में विभिन्न प्रकार की समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं। इसलिए … Read more

अपनी बॉडी टाइप (प्रकृति) कैसे पहचानें? – वात, पित्त या कफ

आयुर्वेद के अनुसार हर व्यक्ति की एक अलग प्रकृति (Body Type) होती है, जो उसके शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक गुणों को निर्धारित करती है। इस प्रकृति का आधार है त्रिदोष—वात (Vata), पित्त (Pitta) और कफ (Kapha)। अपनी प्रकृति को पहचानना बहुत जरूरी है, क्योंकि इससे आप सही आहार, दिनचर्या और जीवनशैली चुन सकते हैं। इस … Read more

त्रिदोष क्या है? (वात, पित्त और कफ का सरल परिचय)

त्रिदोष क्या है? (Vata, Pitta और Kapha का सरल परिचय) आयुर्वेद एक प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति है, जिसमें शरीर, मन और आत्मा के संतुलन को स्वास्थ्य का आधार माना जाता है। आयुर्वेद का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत है त्रिदोष। त्रिदोष तीन प्रकार की ऊर्जाओं का समूह है—वात (Vata), पित्त (Pitta) और कफ (Kapha)। इन तीनों के … Read more

अपनी बॉडी टाइप (प्रकृति) कैसे पहचानें? – वात, पित्त या कफ

आयुर्वेद के अनुसार हर व्यक्ति की शरीर संरचना (प्रकृति) अलग होती है। यह प्रकृति तीन दोषों—वात, पित्त और कफ—से मिलकर बनती है। अपनी प्रकृति को समझना बहुत जरूरी है, क्योंकि इससे आप अपनी सेहत, खान-पान और लाइफस्टाइल को सही तरीके से संतुलित कर सकते हैं। प्रकृति क्या होती है? प्रकृति का मतलब है आपकी जन्म … Read more